Saturday, 4 November 2017

यूं हीं सफ़ेद रंग के नहीं होते एयरप्लेन्स, इसके पीछे हैं ये बड़ी वजह

यूं हीं सफ़ेद रंग के नहीं होते एयरप्लेन्स, इसके पीछे हैं ये बड़ी वजह
उस दिन मेरी पहली फ्लाइट थी और मैं बहुत ज्यादा घबराई हुई थी। मुझे पहले ही ऊंचाई से डर लगता है और ये प्लेन तो ऊपर ही जाने वाला था, बहुत ऊपर। "हे भगवान! मैं इस फ्लाइट में चढ़ी ही क्यों? नहीं नहीं मुझे वापस जाना है।" जब तक प्लेन टेक ऑफ नहीं हुआ मेरे मन में ऐसी अजीबो-गरीब बातें ही चल रही थी। लेकिन फिर जब वो स्टेबल हुआ तो मेरी नजर प्लेन के इंटीरियर पर गई। मुझे सबकुछ वाइट-वाइट दिख रहा था। सफ़ेद रंग देखकर मेरे धड़कते दिल को थोड़ी शांति मिली। बाहर देखा तो प्लेन के विंग्स भी वाइट थे। 
फिर मैंने सोचा कि यार क्या ऐसी शांति के लिए प्लेन में सफ़ेद रंग की अधिकता होती है? हाँ मुझे पता है यह बहुत स्टुपिड सा थॉट था, पर अब आ गया तो आ गया।फिर मैंने इस विषय के बारे में जरा खोजबीन की और मुझे इस संबंध में बहुत अच्छी जानकारी मिली, जो मैं आपके साथ भी शेयर करना चाहती हूँ। 
तो चलिए इन पॉइंट्स पर डालते हैं एक नजर। 

आसानी से दिखते हैं क्रैक

आसानी से दिखते हैं क्रैक
दुर्घटना टालने के लिए किसी भी प्लेन के उड़ान भरने से पहले उसे अच्छी तरह जाँचा जाता है। सफ़ेद रंग होने से क्रैक और डेन्ट्स बहुत जल्दी नजर में आ जाते हैं, और दुर्घटना से बचाव होता है। 

तापमान रहता है संतुलित 

तापमान रहता है संतुलित 
एयरप्लेन का बाहरी हिस्सा सफ़ेद होता है तो यह अधिक मात्रा में लाइट को रिफ्लेक्ट करता है और इससे केबिन के अंदर का तापमान भी कम होता है और यह ठंडा रहता है। 

होती है पैसों की बचत 

होती है पैसों की बचत 
एक प्लेन को कलर पेंट करने में लाखों से करोड़ों का खर्चा आता है।इस खर्चे से बचने के लिए भी उन्हें सफ़ेद रखा जाता है। साथ ही कलर पेंट सूखने में भी 2 से 3 हफ़्तों का समय लगता है।अब इतने टाइम तक काम रोककर तो घाटा ही होना है।

कलर पड़ जाते हैं फीके 

कलर पड़ जाते हैं फीके 
प्लेन्स बहुत अधिक ऊंचाई पर उड़ते हैं।उन्हें कई तरह की एटमोस्फेरिक कंडीशंस का सामना करना पड़ता है। जिससे इनका रंग फीका पड़ जाता है। लेकिन सफ़ेद रंग पर इसका इतना अधिक असर दिखाई नहीं देता हैं। 

बेचने में होती है आसानी 

बेचने में होती है आसानी 
अगर कोई कंपनी प्लेन को रीसेल करना चाहती है तो इसे पैंट करने में खर्च करने से बेहतर है कि वो इसे सफ़ेद रंग में ही रखे। उसे बस लोगो और डिज़ाइन जैसी कुछ चीजें ही बदलनी होगी। 

लीज पर होते हैं प्लेन्स 

लीज पर होते हैं प्लेन्स 
कई एयरलाइन्स प्लेन्स को लीज पर लेती हैं।प्लेन के मालिक ही उन्हें इसे कलर पेंट नहीं करने देते।यहां भी मुद्दा यही है कि उन्हें इसे रीसेल करने में अधिक खर्च ना हो। 

कलर्ड प्लेन होते हैं अधिक वजनी 

कलर्ड प्लेन होते हैं अधिक वजनी 
यह तथ्य आपको थोड़ा अजीब लग सकता है, परंतु यदि प्लेन कलर्ड हो तो वो ज्यादा भारी हो जाता है। वहीं दूसरी ओर सफ़ेद रंग के प्लेन अपेक्षाकृत हलके होते हैं।

प्लेन क्रेश के दौरान मिलती है मदद 

प्लेन क्रेश के दौरान मिलती है मदद 
हालांकि प्लेन क्रैश की घटनाएं बेहद ही कम सुनाई पड़ती हैं परन्तु फिर भी इस तरह की घटनाओं में प्लेन को ढूँढना काफी मुश्किल हो जाता है। लेकिन यदि प्लेन सफ़ेद रंग का हो तो वो मैदान पर गिरा हो या पानी में, उसे ढूंढने में काफी हद तक मदद मिलती है।

देखिए बातों ही बातों में मैंने आपको नई जानकारी भी दे दी न? उम्मीद है कि यह जानकारियां आपको बेहद पसंद आई होंगी।

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